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पंजाब नेशनल बैंक के गौहनिया शाखा प्रबंधक  के तानाशाही रवैया से ग्राहकों को हो रही है परेशानी
May 11, 2020 • राकेश कुशवाहा • राज्य , शहर

 

बारा/प्रयागराज, (स्वतंत्र प्रयाग),  बैंक हमसे चलता है बैंक से हम नही, यह कहना है पंजाब नेशनल बैंक ब्रांच मैनेजर गौहनिया का,  आपको बता दे कि आर  बी आई ने कोविड 19 के चलते आर्थिक मंदी को देखते हुए देश के सभी बैंकों के ग्राहकों के लिए लॉकडाउन के चलते रोजगार बन्द होने की स्थिति में ग्राहकों को प्रोत्साहित करने और धंधा बन्द होने की स्थिति में अपने ग्राहकों को जो किसी कारण से पैसा फस जाने व अन्य किसी कारणों से अपने धंधे में फेल हो रहे है।  

उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए फिर से दोबारा मदद करके रिफाइनेंस करके रोजगार के लिए ब्यवस्था करके नए ढंग से काम शुरू करने के लिए योजना तैयार करके ब्यवस्था तलासने का कार्य कर रही है।
 

वही पंजाब नेशनल गौहनिया शाखा के बैंक प्रबन्धक  की मनमानी तथा तानासाही रवैया के चलते सरकार की योजना का लाभ गरीब ग्राहकों को नही मिल पा रहा है जिससे ग्राहकों में असंतोष ब्याप्त है।                          

   पंजाब नेशनल बैंक के सर्किल आफिस से ग्राहकों को फोन करके मैसेज करके कहा जा रहा है कि आप लोग लॉकडाउन के चलते अगर किसी कारण बस पैसे का लेनदेन नही कर पाए है तो सरकार की तरफ से आपको फिर से संभालने का मौका दे रही है।

इस पर ग्राहक पंजाब नेशनल की शाखा में संपर्क करके रोजगार के अवसर की बात करते  है तो ब्रांच मैनेजर गौहनिया ब्रांच कैशियर तथा प्रबंधक  के द्वारा यही  बताया जाता है कि सरकार का या आरबीआई के नियम यहां नही चलता यह केवल मेरा आदेश चलता है जैसा हम चाहेंगे जो रिपोर्ट हम यहां  से भेजेंगे वही सर्वमान्य  होगी कई ग्राहक केसीसी के लिए या किसी भी कर्ज के लिए बात करते है तो ब्रांच मैनेजर तथा कैशियर द्वारा यह कह कर वापस कर दिया जाता है कि आदेश जो भी हो मैं जो करूंगा वही होगा ।
 

कई ग्राहक शाखा में बात करने गए तो उन्हें  बस यही जबाब मिलता है कि बैंक मुझसे चलता है हम बैंक से नही अब ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि गौहनिया ब्रांच क्या आरबीआई के अलग नियम से चलती है या ब्रांच मैनेजर कैशियर के कथनानुसार चलती है।
 

ब्रांच मैनेजर तथा कैशियर दोनों कर्मचारी लोकल है दोनों लोगो की मिलीभगत से उसी ग्राहक का लोन हो पाता है जो मैनेजर और कैशियर  का करीबी होता है या उनके कहने के अनुसार काम करता है एक नही कई ऐसे उदाहरण है जिसकी अगर जांच हो जाय तो दूध का दूध पानी का पानी हो सकता है।

 एकाध ऐसे ग्राहक है जो बैंक मैनेजर की जी हजूरी करके जो दूसरे प्रान्त के रहने वाले है बैंक से कर्ज आसानी से लेकर काम करते है।वह भी काम नही बैंक से पैसा लेकर दूसरो को औने  पौने ब्याज पर लोगो को पैसा देते है जिसमे मैनेजर तथा कैशियर का भी शेयर बताया जाता है।
 

अब बात जो भी हो यह तो जांच करने पर पता चलेगी किन्तु यह तो सच है कि दूसरे प्रान्त के लोगो को कर्ज देकर प्राइवेट धंधा ब्याज पर कराया जा रहा है।  इस संबंध में एक कस्टमर ने बताया कि मैंने पैसा नही दिया तो  मुझे लोन नही दिया गया उसका कहना था कि मेरा बिजनेस कमजोर रहा मुझे बहुत धंधे में घाटा लगा फिर भी मैन बैंक का ब्याज दिया, जब मैंने कहा कि मुझे कुछ और पैसा दे दीजिए तो मुझे पैसा नही दिया गया । 

अगर इस मामले की जांच उच्चाधिकारी करे तो दूध का दूध पानी का पानी हो सकता है,  अब बात जो भी हो यह तो अधिकारी और बैंक के कर्मचारी ही जाने किन्तु एक नही दर्जनों लोगों की बात से ऐसा लग रहा है कि बैंक के कर्मचारी अधिकारी ग्राहकों के साथ ज्यादती कर रहे है । 

कई ग्राहकों ने आरोप लगाया है कि जो भी बैंक का स्टॉप है लोकल है दबंगई के चलते ग्राहकों को योजनाओ का लाभ नही मिल पाता जिससे लोगो मे आक्रोश है।क्षेत्रीय लोगो ने जिलाधिकारी प्रयागराज का ध्यान आकृष्ट करते हुए जांच कराने की तथा लोकल बैंक कर्मचारियो का तबादला करने की जोरदार मांग किया है।