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पाक ने आतंकी हाफिज सईद सहित कई आतंकियो को जेल से किया रिहा , वहां पर कोरोना का था भय ,कश्मीर में आतंकी घुसपैठ बढ़ी
May 3, 2020 • एस पी एन न्यूज़ डेस्क • राष्ट्रीय

 


नई दिल्ली,(स्वतंत्र प्रयाग) पाकिस्तान ने हाफिज सईद समेत कई आतंकियों को जेल से छोड़ दिया है, जिन पर कार्रवाई का ढोंग दिखाकर उसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फंडिंग मे छूट ली थी, ऐसे मे एक बार फिर से दुनिया के सामने पाकिस्तान ने ये साबित कर दिया कि, उस उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है, दुनिया क्या कहेगी, उसका काम आतंक फैलाना है, जिसे वो पूरी शिद्दत के साथ फैलाने के लिए लगा हुआ है  जेल मे कोरोना से हुई मौत के बाद पाकिस्तान ने हाफिज़ सईद को छोड दिया है, इसमे कहा गया है कि, कुछ पाबंदियों के साथ उन्हे जेल से रिहा किया गया है, क्यूंकी व्यापक स्तर पर कोरोना से उसे खतरा है।

कुछ महीनो पर ही जब ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स’ यानि FATF ने उसे ब्लैकलिस्ट करने कि धमकी दी थी, जिसके बाद ही पाकिस्तान ने हाफ़िज़ सईद को उसने जेल भेजा था, उस वक़्त अगर पाकिस्तान ने हाफिज़ सईद को जेल नहीं भेजा होता तो उसे विदेशी पैसा नहीं मिलता, इसलिए उसने ऐसी कार्यवाई कि थी।

लेकिन अब हाफ़िज़ सईद के जेल से बाहर आकर लश्कर-ए-तैयबा समेत कई संगठनों के दहशतगर्द भारत के खिलाफ नई साजिश की तैयारी में वो फिर से जुट गया है  यही कारण है कि, कश्मीर मे लगातार इस वक़्त आतंकियों कि घुसपैठ जारी है।

 

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री ने पिछले महीने ट्वीट कर बताया था कि, लाहौर जेल में करीब 50 कैदी कोरोना पॉजिटिव मिले हैं इस मौके को भुनाते हुए पाकिस्तान ने आतंकियों को तुरंत छोड़ दिया अभी दुनिया का ध्यान कोरोना से लड़ाई में लगा हुआ है  पाकिस्तान इसका फायदा उठाकर जमीनी हकीकत को छुपाने मे जुट गया है।

एफएटीएफ ने अभी पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा हुआ है. यदि हाफ़िज़ सईद को वो जेल मे नहीं भेजता तो उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता, फिलहाल इस फाइनेंशियल समूह कि आगामी बैठक मे ही तय होगा, कि, उसे आगे कितना और कैसी आर्थिक मदद मिलेगी  जनवरी 2020 मे पाकिस्तान को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एफएटीएफ की बैठक होनी थी  कोरोनावायरस के चलते यह बैठक दो बार टाली गई है।

जून में होने वाली यह बैठक के अब अक्टूबर में होने का अनुमान है एफएटीएफ कि टीम इस बात कि समीक्षा करेगी कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को रोकने के लिए क्या तैयारियां कि हैं, जिसके बाद ही उस पर कोई आगे फैसला होगा।