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मां का है दर्द , मैं पॉजिटिव हूँ, बेटी मेरा आँचल  समझती है , मैं 8 महीने की बच्ची से कैसे रहू दूर
May 1, 2020 • एस पी एन न्यूज़ डेस्क • राज्य , शहर


इंदौर,(स्वतंत्र प्रयाग)पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है भारत कोई भी राज्य ऐसा नही बचा है जहां इस महामारी ने अपना कहर न दिखाया हो लेकिन इस महामारी के कारण कई ऐसे किस्से निकाल कर सामने आ रहे है जो बेहद ही मार्मिक है और दिल को छू जाने वाले है।

एक माँ और 8 महीने के एक बच्चे की कहानी है जिसमें माँ ने लिखा है की “मैं मां हूं... बेटी मेरा आंचल समझती है आठ माह से बेटी की मैं ही दुनिया और वह मेरी दुनिया है  जब बेटी को लेकर जाने की बात आई तो मां रोने लगी कई मिनट तक आंखों से दर्द आंसुओं के रूप में बहता रहा।

यह दर्द उस मां का है जो कोरोना पॉजिटिव है  जो उसकी आठ माह की बेटी को भी पूरी सुरक्षा के साथ संभाल रही है  क्योंकि पति भी क्वारंटाइन हैं एक वक्त लगा कि बेटी दूर हो जाएगी  तो फूट-फूट कर बेटी के दूर होने के दर्द में रोने लगी फिर निर्णय हुआ कि अगर मां सुरक्षित तरीके सारे प्रॉटोकॉल का पालन कर बेटी को रखे तो उसे खतरे से बचाया जा सकता है।

यह कहानी पीथमपुर की एक मां व मासूम 8 माह की बेटी की है  पीथमपुर की यह मां कोरोना पॉजिटिव हैं  जिसका आइसोलेशन में इलाज चल रहा है उसकी एक आठ माह की बेटी है पति क्वारंटाइन में हैं  बेटी अभी मां के दूध पर ही पल रही है लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते बेटी को दूर रखने की बात आई तो मां बेटी की जुदाई के अहसास में ही रोने लगी।

अस्पताल प्रबंधन ने निर्णय लिया कि अगर मां सुरक्षित तरीके से बेटी को संभाले तो उसे कोरोना के खतरे से बचाया जा सकता है  मां का कहना था कि अगर मेरी बेटी को दूर करने में वह सुरक्षित है तो ऐसा कर सकते हैं उससे बेटी के दूध और उस मासूम को संभालने की चिंता भी थी।

क्योंकि मां का आंचल तो मां का आंचल होता है वह जब चाहे भूख लगने पर मां के आंचल का साया दे सकती है लेकिन अगर कोई उसे रखेगा तो शायद वह मां जैसी देखभाल नहीं कर पाए अब मां पूरी सावधानी बरत रही है ताकि बेटी सुरक्षित रहे वह मास्क पहनकर दूध पिलाती है  बार-बार हाथ धोती है सैनिटाइज करती है।

जब भी बेटी को पास रखती है तो पूरे सुरक्षा के इंतजाम करती है, ताकि बेटी तक कोरोना नहीं पहुंच सके  मां-बेटी की मजबूरी या फिर कहे मां का अपने बेटी के प्रति प्यार देखकर हर कोई द्रवित हो जाता है  नर्स श्वेता व अन्य नर्सों का मानना है कि मां की जगह कोई नहीं ले सकता है  जब उसकी बेटी को लेकर दूर करने की बात ही आई तो वह मां उस डर से ही रोने लगी क्योंकि आठ में बच्चा मां के ही सबसे ज्यादा करीब होता है।