ALL प्रमुख खबर राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय राज्य , शहर खेल आर्थिक मनोरंजन स्वतंत्र विचार अन्य
देश भर में मजदूरों की मौत , कोरोना से ज्यादा खतरनाक भूख , मजदूरों को शहर छोड़ना देश के लिए शर्म की बात
May 9, 2020 • एस पी एन न्यूज़ डेस्क • राष्ट्रीय

नई दिल्ली,(स्वतंत्र प्रयाग)पूरे देशभर मे कोरोना वायरस का कहर जारी है, इसी बीच अपने पेट की भूख से खुद को बचाने के लिए शहरों से गांवो की ओर पैदल निकल पड़े मजदूरों के लगातार मरने का सिलसिला शुरू हो चुका है  अब देशभर से ऐसे गरीबो के मरने कि खबरें आ रही है।

औरंगाबाद में ट्रेन हादसे में उमरिया और शहडोल की 16 मजदूरों की मौत ने सभी को हिलाकर रख दिया, इसके अलावा मध्यप्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से भी शनिवार को पैदल सफर पर निकले मजदूरों की मौत की खबरें सामने आई  ट्रेन की पटरी पर कटकर मरने वाले 15 मजदूरों के बाद ऐसी घटनाओं मे तेजी आ गई है।

वरिष्ठ पत्रकार भगवत प्रसाद शुक्ल के मुताबिक आंकड़ो का खेल हर किसी के समझ नहीं आता, लेकिन जीतने गंभीर ये गरीबो के मरने वाले आंकड़े हैं, उससे कहीं ज्यादा डरावनी इसकी वास्तविकता है, आप सोच नहीं सकते हैं, कि कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक भूख है।

भूख से रोते बच्चे को एक माँ कब तक झूठ बोलकर सुलाएगी, कब तक बाप सक्षम होकर भी कमरे मे बंद रहेगा, वो विरोध करेगा तो जेल होगी, घर मे रहेगा तो भूख से पहले बच्चों कि फिर उसकी मौत होगी, इसी डर से ये बेचारे पैदल चलकर आने को मजबूर हैं  इन मजदूरों मे कौन देखता है जात बिरादरी धर्म अधर्म, इन्हें सिर्फ परिवार कि सुरक्षा और  खाना चाहीए।


ये वो मौत हैं, जिनसे देश शर्म सार हो रहा है, जिनसे हर राज्य की सरकार को बेज्जत हो रही है  केंद्र का पीएम केयर फंड किस लिए बनाया गया? ऐसे तिलतिल कर मरने के लिए मजदूर क्यूँ भाग रहे हैं? स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला इतनी देर से क्यूँ लिया गया? क्या इन्हें राज्य सरकारें भोजन नहीं करा सकती 22 मार्च के लॉकडाउन के बाद से लेकर अब तक देश भर मे कोरोना से मरने वाले लगभग 750 लोग हैं, लेकिन इतने ही मजदूर वो गरीब हैं, जो सिर्फ बच्चे पालने और भूख मिटाने के लिए गाँव से शहर भागे थे अब फिर से गांव आने को बेताब हैं।

मध्य प्रदेश मे बीती 24 घंटों मे लगभग 4 मजदूर मरने की खबर है, वहीं उत्तर प्रदेश के लखनऊ मे एक सायकिल से बिहार जा रहे पति पत्नी की मौत हो गई, जिसके बाद दो छोटे छोटे बच्चे अनाथ हो चुके हैं, उत्तर प्रदेश के ही बस्ती मे मुंबई से पैदल चलकर पहुचे लड़के को जब क्वारंटाइन सेंटर मे रखा गया, जहां उसकी मौत हो गई, 28 दिन की पैदल यात्रा के बाद महाराष्ट्र से आए 4 लोगों मे से बिहार के बेगुसराय मे मौत हुई।

 

अब कोरोना से हो रही मौत के बाद देशभर के आंकड़ों को देखें तो इनकी संख्या कहीं ज्यादा और भयानक दिखाई पड़ती है, क्यूंकी ये गरीब सिर्फ अपने बच्चों को भोजन दे सकें, इसके लिए शहरों की ओर भागे थे, लेकिन अब ऐसा लगता है कि वहीं पेट कि भूख इन्हें शहर मे मार देगी, इसीलिए ये अपने गांवो कि तरफ भाग रहे है।