ALL प्रमुख खबर राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय राज्य , शहर खेल आर्थिक मनोरंजन स्वतंत्र विचार अन्य
12 वर्षो से कुंवारे नौजवानों के अरमानों पर पानी फेर रहा बाढ़, फिर भी सरकारी महकमा मौन
August 26, 2020 • एस पी एन न्यूज़ डेस्क • राज्य , शहर

फर्रुखाबाद(स्वतंत्र प्रयाग न्यूज)21शदी में भी भारत में आज भी एक ऐसा गांव जहां पर हर तरफ कुंआरे ही कुंआरे हैं। उस पर इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दूसरे गांव के लोग इस गांव में अपनी बेटियों की शादी करने से घबराते हैं। पिछले छह साल में यहां किसी कुंआरे के सिर पर विवाह का मौर नहीं बंधा। अब सोच रहे है कि ऐसा क्यों हो रहा है। पर पीछे की वजह जानकर चौंक जाएंगें।

कटरी के 17 गांव ऐसे हैं जहां शादियों का ग्राफ साल दर साल कम हो रहा है। लोग यहां अपनी बेटियों को ब्याहने से कन्नी काटते हैं। ऐसे में इन गांवों में कुंआरों की संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले छह साल में यहां किसी कुंआरे के सिर पर विवाह का मौर नहीं बंधा। घर के बड़े-बूढ़े लड़कियों के तो संबंध तय कर आते हैं पर कोई अपनी लड़की का संबंध यहां जोड़ने नहीं आता।

कुंआरों के अरमानों पर पानी फेर रही ये :- कमालगंज, अमृतपुर, शमसाबाद ब्लाक के कटरी के गांव समैचीपुर, सुतिहार, गंगलई, साधो सराय, हरसिंगपुर ऐसे गांव हैं जो बाढ़ से हर साल तबाह होते हैं और बाढ़ के बाद फिर बसते हैं। उजड़ना और बसना उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। बरबादी का यह आलम कुंआरों के अरमानों पर पानी फेर रहा हैं। गांववालों का दर्द सुनने के बाद लड़की वाले अपनी बेटी का रिश्ता करने से तौबा कर लेते हैं। यहां तो बाढ़ आने से पहले जिंदगी बचाने के लिए गांव खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। ऐसे में कोई यहां रिश्ता लेकर आ भी जाता है तो सारी कथा सुनकर वापस नहीं लौटता।

बेटी की शादी करने से काट लेते हैं कन्नी :- ग्रामीण वीरपाल, रामवीर सर्वेश बताते हैं कि कटान और बाढ़ से लोग बेटी का रिश्ता लेकर नहीं आते हैं। बाढ़ के दौरान नाते-रिश्तेदारों से संपर्क कट जाता है। जमापूंजी को भी बाढ़ नुकसान पहुंचाती है। इससे लोग बेटी ब्याहने से डरते हैं। गांववालों का दर्द सुनने के बाद ज्यादातर लड़कीवाले अपनी बेटी की शादी करने से कन्नी काट लेते हैं। बातचीत पूरी होने के बाद जब उन्हें यह पता चलता है कि बारिश के मौसम में पलायन करना पड़ता है तो फिर वह पलटकर नहीं आते। इन गांवों में दूल्हा तलाशने वालों की आवाजाही में तकरीबन सन्नाटा बना रहता है। बिजली का आलम यह है कि बीते दो वर्ष पूर्व गाँव में बिजली के खम्भे लगे थे कनेक्शन भी दिये गये थे। केवल पांच दिन बिजली चलने के बाद दो वर्ष हो गए अभी तक गाँव में बिजली के दर्शन तक नही हुए।